लोकसभा, व विधानसभा की संख्या बढ़ाना देश पर अनावश्यक आर्थिक बोझ डालने जैसा-राजमणि

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रीवा, 25 मार्च 2026,Rewadarshannews18 Upendra Dwivedi

देश की आधी आबादी महिलाओं को लोकसभा, राज्यसभा, विधानसभा मे 33 प्रतिशत आरक्षण प्रदान करने के नाम पर लोकसभा, राज्यसभा और विधानसभा की सीटें बढ़ाना देश पर अनावश्यक आर्थिक बोझा डालने जैसा है। उक्त आशय का बयान जारी करते हुये कांग्रेस पार्टी के वरिष्ठ नेता पूर्व राज्यसभा सांसद राजमणि पटेल ने केन्द्र सरकार के इस कदम पर अपनी तीखी प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुये कहा है कि लोकसभा और विधानसभा की सीटें बढ़ाने की बजाय शिक्षकों और चिकित्सकों की संख्या बढ़ानी चाहिये ताकि भारत के आम आदमी को पर्याप्त स्वास्थ्य सुविधा तथा नौनिहालों को बेहतर शिक्षा मिल सके। श्री पटेल ने कहा कि शहरी क्षेत्र मे हजार लोगों पर एक डॉक्टर है, जबकि ग्रामीण क्षेत्रों मे तकरीबन 25 से 30 हजार के आबादी के बीच मे एक डॉक्टर है। उन्होने कहा कि 80 फीसदी से अधिक डॉक्टर शहरों मे निवास करते हैं, श्री पटेल ने कहा कि जब देश कर्ज मे डूबा हो तब लोकसभा, विधानसभा और राज्यसभा की सीटे बढ़ाने का औचित्य सफेद हाथी पालने जैसा है। उन्होने कहा कि केन्द्र सरकार सीटों की संख्या बढ़ा कर महिला आरक्षण देना चाहती है, ताकि राजनैतिक क्षत्रपों की सीटें आरक्षित होने से बच जाय। श्री पटेल ने कहा कि सरकार की नियत अगर महिला आरक्षण के प्रति पाक-साफ है तो वर्तमान सीटों मे ही आरक्षण लागू करना चाहिये। उन्होने यह भी कहा कि परिसीमन करके सीटे बढ़ाने के बजाये विकासखण्डों, जनपदों तथा तहसीलों की सीमाओं का पुर्ननिर्धारण करना चाहिये, जिससे जन सामान्य की समस्याओं का त्वरित निराकरण हो सके। श्री पटेल ने बताया कि लोकसभा की 263 और राज्यसभा की 87 सीटें बढ़ने से 24 करोड़ रूपये मासिक आर्थिक बोझ बढ़ेगा और इससे जनता को कोई बुनियादी लाभ नही है। श्री पटेल ने कहा कि महिला आरक्षण मे अनुसूचित जाति एवं जनजाति की तरह पिछड़ा वर्ग की महिलाओं को भी आरक्षण का लाभ दिया जाना चाहिये।

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