रीवा में अब अवैध कालोनाइजरों की खैर नही प्रशासन ने नियमों को ताक पर रखकर जमीन का कारोबार करने वालों पर कसा शिकंजा

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रीवा 26,मार्च 2026,Rewadarshannews18 Upendra Dwivedi

“रीवा में अब अवैध कालोनाइजरों की अब खैर नहीं… क्योंकि प्रशासन ने अब यह साफ कर दिया है कि नियमों को ताक पर रखकर जमीन का कारोबार करने वालों पर सीधा वार किया जाएगा यही वजह है कि कलेक्टर एवं जिला दण्डाधिकारी श्रीमती प्रतिभा पाल ने बड़ा और सख्त एक्शन लेते हुए दो अलग-अलग मामलों में अवैध कॉलोनी विकसित करने वालों पर एफआईआर दर्ज करने का आदेश दे दिया है !


सीधे तौर पर कहा जाए तो अब अवैध प्लाटिंग और बिना अनुमति के कॉलोनी काटने का खेल चलाने वालों के खिलाफ प्रशासन ने मोर्चा खोल दिया है पहला मामला जुड़ा है मेसर्स शांति इंफ्रास्ट्रक्चर और शांति विलास इंफ्रा प्रोजेक्ट से जिसके संचालक उपेन्द्र सिंह पर गंभीर आरोप हैं कि उन्होंने बिना कालोनाइजर लाइसेंस लिए, बिना सक्षम प्राधिकारी की अनुमति के, बीहर नदी के किनारे शांति रायल स्टेट नाम की कॉलोनी विकसित करना शुरू कर दिया इतना ही नहीं नियमों को दरकिनार करते हुए प्लॉट और फ्लैट की बिक्री भी शुरू कर दी गई और सबसे चौंकाने वाली बात ये है कि बीहर नदी के बहाव क्षेत्र में मिट्टी और मलवा डालकर नदी के प्राकृतिक प्रवाह को ही बाधित करने की कोशिश की गई जो सीधे तौर पर एनजीटी के नियमों का उल्लंघन है यानी ना सिर्फ अवैध निर्माण बल्कि पर्यावरण के साथ भी खुला खिलवाड़!

जांच में यह भी सामने आया कि मढ़ी और करहिया के नालों के स्वरूप को बदलकर उन्हें संकरा किया गया जिससे भविष्य में जलभराव और बाढ़ जैसी स्थितियां पैदा हो सकती हैं और हैरानी की बात यह कि ग्राम पंचायत के सरपंच से एनओसी लेकर कॉलोनी बनाई गई जबकि कानून साफ कहता है कि कॉलोनी विकसित करने की अनुमति देने का अधिकार केवल कलेक्टर को है अब बात दूसरे मामले की जहां शाहीन बेगम, अमरीन अंसारी पर भी अवैध प्लाटिंग और कॉलोनी निर्माण का आरोप है यहां भी वही कहानी बिना लाइसेंस, बिना अनुमति, और बीहर नदी के अपवाह क्षेत्र में अतिक्रमण जांच में यह भी सामने आया कि कागजों में जमीन को कृषि भूमि बताया गया लेकिन सेटेलाइट इमेज में वहां पक्के मकान खड़े नजर आए यानी साफ तौर पर धोखाधड़ी और नियमों का उल्लंघन!

अब प्रशासन ने इन दोनों मामलों में कड़ा रुख अपनाते हुए साफ निर्देश दिए हैं कि मध्यप्रदेश पंचायतराज एवं ग्राम स्वराज अधिनियम 2013 की धारा 61-घ के तहत आपराधिक प्रकरण दर्ज किया जाए और यही नहीं भू-राजस्व संहिता 1959 की धारा 172 के तहत दोषी पाए जाने पर 3 से 7 साल तक की सजा और जुर्माना भी हो सकता है!


कलेक्टर ने यह भी स्पष्ट कर दिया है कि अवैध कॉलोनियों को प्रशासन अपने नियंत्रण में ले सकता है और इसी के तहत एक चार सदस्यीय जांच टीम भी गठित कर दी गई है जिसमें एसडीएम हुजूर, नगर एवं ग्राम निवेश के अधिकारी और पीडब्ल्यूडी के अधिकारी शामिल हैं टीम को एक महीने के भीतर पूरी जांच रिपोर्ट सौंपने के निर्देश दिए गए हैं!


साथ ही तहसीलदार को निर्देश दिए गए हैं कि तीन दिन में भू-अभिलेख अपडेट करें और एक सप्ताह के भीतर कब्जा रिपोर्ट पेश करें तो साफ है… रीवा में अब अवैध कॉलोनाइजरों के दिन गिने-चुने हैं… प्रशासन पूरी ताकत के साथ मैदान में उतर चुका है… और आने वाले दिनों में ऐसे और भी बड़े एक्शन देखने को मिल सकते हैं… क्योंकि अब नियमों से खिलवाड़ करने वालों को बख्शा नहीं जाएगा!

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