भाजपा अध्यक्ष: सत्ता नहीं, जिम्मेदारी!
रीवा, 21 जनवरी 2026, REWADARSHANNEWS18
अक्सर राजनीति में ‘अध्यक्ष’ शब्द को सत्ता, पावर और रसूख से जोड़कर देखा जाता है, लेकिन भारतीय जनता पार्टी में यह एक दायित्व है, अधिकार नहीं।
दुनिया की सबसे बड़ी राजनीतिक पार्टी का नेतृत्व करना केवल एक सम्मान नहीं, बल्कि करोड़ों कार्यकर्ताओं की उम्मीदों और संगठन की विचारधारा को सींचने की एक कठिन तपस्या है।
यहाँ नेतृत्व किसी रिमोट कंट्रोल या पारिवारिक विरासत से तय नहीं होता, बल्कि वही व्यक्ति शिखर तक पहुँचता है जिसने बूथ स्तर पर पसीना बहाया हो और अपनी मेहनत, निष्ठा तथा काबिलियत को बार-बार साबित किया हो।
भाजपा के संविधान में अध्यक्ष को सर्वोच्च अधिकार प्राप्त हैं, लेकिन कार्यशैली में वे स्वयं को प्रथम कार्यकर्ता मानते हैं। चुनाव प्रबंधन से लेकर गठबंधन की रणनीति और डिजिटल युग की चुनौतियों तक, अध्यक्ष हर मोर्चे पर संगठन की ढाल बनकर खड़े रहते हैं।
यहाँ कार्यकाल समाप्त होने के बाद अध्यक्ष पुनः एक साधारण कार्यकर्ता के रूप में पार्टी की सेवा में जुट जाते हैं।
यही वह लोकतांत्रिक खूबी है, जो भाजपा को अन्य दलों से अलग और अद्वितीय बनाती है।





