भ्रष्टाचार की जांच करने वाली एजेंसी ईओडब्ल्यू पर खुद लगे भ्रष्टाचार के आरोप

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रीवा 20 जनवरी 2026,Rewadarshannews18

आर्थिक अपराध प्रकोष्ठ रीवा की कार्यवाही पर उठ रहे सवाल…?

गुढ़ तहसील में की गई कार्यवाही में हो गया बड़ा खेल, दबाव में आई जांच टीम

आउट सोर्स कर्मचारी को फंसाने और तहसीलदार को बचाने किया जा रहा प्रयास

आरोपी भगवान दास चौरसिया का बयान तहसीलदार के कहने पर लिया रिश्वत

शिकायत कर्ता बृजेन्द्रमणि त्रिपाठी ने बड़ा आरोप लगाया है और आर्थिक अपराध की कार्यवाही को कठघरे में खड़ा कर दिया है, साथ ही उन्होंने कहा है कि गुढ़ तहसील में छापामार कार्यवाही करने गई आर्थिक अपराध प्रकोष्ठ रीवा की टीम तहसीलदार अरुण यादव को बचाने का प्रयास कर रही है, तथा एक आउट सोर्स कर्मचारी को बलि का बकरा बनाया जा रहा है, जब कि आउट सोर्स कर्मचारी के पास उस कार्य की जिम्मेदारी ही नहीं है जिस कार्य के लिए उसे दोषी ठहराया गया है और उसके खिलाफ कार्यवाही की गई है, आरोपी बनाये गये कम्पूटर आपरेटर भगवान दास के पास सिर्फ निर्वाचन शाखा की जिम्मेदारी थी, लेकिन तहसील दार ने अधिकारी होने का दबाव बना कर उसे 10,000 रुपये घूस के लिए कहा और दबाव बनाया, इधर घूस लेते हुए आउट सोर्स कर्मचारी भगवान दास को ट्रेप कर लिया गया, जिसमें मुख्य आरोपी तहसीलदार को बनाया जाना चाहिए लेकिन ईओडब्ल्यू की टीम तहसीलदार को बचाने में जुट गई है, क्योंकि शासकीय कार्यालयों में भ्रष्टाचार करवा कर पार्टनर शिप का खेल खेलने वाले किसी नेता का दबाव आ गया था, दबाव आने के बाद ईओडब्ल्यू के सुर पूरी तरह बदल गए, और शिकायत कर्ता पर दबाव बनाया जाने लगा, और उल्टा उन्हें ही धमकी दी जाने लगी तथा ज़बरदस्ती अपने हिसाब से बयान लिख कर उनसे सिग्नेचर कराने का भी पुरजोर प्रयास किया जाने लगा, इससे बड़ी जांच एजेंसी की मनमानी और तानाशाही क्या हो सकती है l इस बात को देखते हुए शिकायत कर्ता को किसी तरह चुपके से अपनी जान बचा कर वंहा से भागना पड़ा क्योंकि उनसे ज़बर्दस्ती सिग्नेचर करवाई जा रही थी l

जिंदगी बर्बाद करने की तहसीलदार ने दी धमकी

इतना ही नहीं जांच टीम के सामने ही आरोपी तहसीलदार अरुण यादव ने शिकायत कर्ता को बर्बाद करने की धमकी भी दी है, वहीं छापामार की कार्यवाही करने गई ईओडब्ल्यू की टीम बेबस और लाचार की तरह तमाशा देख रही थी, तथा आउट सोर्स कर्मचारी को आरोपी बना कर अपनी स्वयं की पीठ थपथपाई जा रही थी और सारा का सारा दोष एक गरीब और छोटे से कर्मचारी पर मढ़ दिया गया, जब कि तहसीलदार के बग़ल में बैठ कर कंप्यूटर आपरेटर भगवान दास चौरसिया ने 10,000 हजार रुपये अपने हांथ में तहसीलदार के कहने पर उन्हीं की मौजूदगी में लिया हैl

साहब पैसे दे दिए अब तो काम कर दो..

शिकायतकर्ता ने डिमांड के अनुसार आउट सोर्स कर्मचारी को पैसे दिए उसके बाद उन्होंने तहसीलदार को बताया कि 10,000 रुपये आपके कथन अनुसार भगवान दास को दे दिए गए हैं, अब हमारा काम कब तक होगा, तो तहसीलदार ने कहा ये बात यहां मत करिये आप का काम दो दिन में हो जायेगा इस बात की रिकार्डिंग बिधिवत आर्थिक अपराध प्रकोष्ठ के रिकार्डर में भी दर्ज है, इसके बाद भी ईओडब्ल्यू की टीम भ्रष्टाचार के खिलाफ कार्यवाही करने की बजाय खुद भ्रष्टाचार को पनाह देने में जुट गई ताकि एक भ्रष्टाचारी को बचाया जा सके l

ईओडब्ल्यू अधिकारी का आडियो वायरल

चल रही छापामार कार्यवाही को लेकर मीडिया कर्मी द्वारा दूरभाष पर जांच अधिकारी से बात की गई और जांच के सम्बंध में जानकारी लेनी चाही जिसमें जांच अधिकारी द्वारा साफ तौर पर तहसीलदार और कम्प्यूटर आपरेटर दोनों को दोषी बनाए जाने की बात बताई गई है, लेकिन कुछ ही समय बाद स्थिति अपने आप बदल गई, और आरोपी सिर्फ आउट सोर्स कर्मचारी को बना दिया गया, ऐसे में आर्थिक अपराध प्रकोष्ठ की कार्यप्रणाली पर सवाल उठने लगे हैं l

शिकायतकर्ता जांच से असंतुष्ट ज़बर्दस्ती सिग्नेचर का बनाया जा रहा दबाव

शिकायतकर्ता बृजेन्द्रमणि त्रिपाठी के मुताबिक उन पर हस्ताक्षर करने ज़बरदस्ती दबाव बनाया जा रहा था, लेकिन उन्होंने दस्तखत करने से इंकार कर दिया, वहीं जांच टीम भी ज़बर्दस्ती दबाव बना कर तहसीलदार को बचाने के प्रयास में कार्य कर रही थी, जिसके बाद शिकायत कर्ता खुद को असुरक्षित महसूस कर रहे थे, और किसी तरह से मौका पाकर बिना दस्तखत किए ही वंहा से 2 बजे रात निकल लिए और अपने घर पहुंच गए, इधर अभी भी लगातार आर्थिक अपराध की टीम उन पर दबाव बना रही हैl

तहसीलदार के कहने पर ली गई रिश्वत

आउट सोर्स कर्मचारी भगवान दास चौरसिया ने मीडिया को जानकारी देते हुए बताया कि वह निर्वाचन शाखा में पदस्थ है, ईओडब्ल्यू और आर्डर सीट के कार्य से उनका कोई लेना-देना नहीं है ना,ही उनके पास ऐसा कोई दायित्व ही है, और इनके कंही सिग्नेचर भी नहीं हुए है, तहसीलदार अरुण यादव ने 10, हज़ार रुपये की रिश्वत लेने का मुझे निर्देश दिया था, छोटा कर्मचारी होने के नाते मैं मना नहीं कर पाया, और बलि का बकरा बन गया, मुझ जैसे गरीब व्यक्ति को अपनी रोजी रोटी से हांथ धोना पड़ रहा है, और मेरा घर परिवार सड़क पर आ जायेगा जबकि इसमे मेरी कोई गलती नहीं हैl

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