रीवा 30,मई 2026.Rewadarshannews18 Upendra Dwivedi
बेह्तरीन और सार्थक कदम रीवा एसपी साहब का… अगर समय रहते जिसका जो कार्य है वही करे तो समाज मे वैमनस्य की समस्या न होने पाए..दिक्कत तब होती है जब लोग अपनी राजनीति और खुद का घर भरने.. और नेता बनने के लिए…कानून को स्वयं अपने हांथ लेकर कानून को दरकिनार कर खुद को समाज का ठेकेदार समझने लगते है और यह सिर्फ Facebook, instgram WhatsApp, Messenger और अन्य सोशल मीडिया प्लेटफार्म पर प्राय:दिखाई देते है…
असल जिन्दगी में जब इन्हीं तथाकथित समाज के ठेकेदारों की किसी समस्या में उलझे व्यक्ति को रील से परे रियल में मदद की आवश्यकता पड़ती है तो ये बिल्कुल नहीं दिखाई देते या फिर गायब रहते है… ये तो बस खुद के फेमस होने, नेता गीरी करने और पब्लिसिटी के लिए तभी इकट्ठे होते है जब भीड़ इकट्ठी हो… तभी ये अपनी नेतागीरी चमकाने आते है….मैं सभी जाति के ठेकेदारों से पूछना चाहता हूं कि ये उस समय कहाँ जाते है जब उन्हीं के समाज का एक गरीब और कमजोर व्यक्ति अपनी बिटिया या बेटे की शादी करने के लिए आगे कदम बढ़ाता है…अपनी लाचारी और मजबूरी को समाज के सामने रखता है…तब इन्हीं जाति वादियों के सामने….जाति बाद से परे भी एक असली घृणित भावना उभर कर निकलती है, गरीबी अमीरी की, स्टेटस और रुतबे की…. जो इस जातिवाद से कंही अधिक घातक और नासूर सिद्ध हो रही है..क्यों कि जो जातिवाद का असली जहर घोलते है वही अपने जाति के गरीब के साथ संबंध नहीं रखते उसके साथ भेदभाव रखते है तब कहाँ जाता है इनका ये संभाव.. भले ही ये मंच में और सोशल मीडिया मे अपने जाति का मसीहा बनने का नाटक करते हों…लेकिन जब असल में इनकी जरूरत पड़ती है तब इस स्वजातीय लोगों के सामाने इसका स्टैंडर्ड और लेबल आड़े आ जाता है और ये खुद किसी गरीब के साथ भेदभाव करते देखे जाते हैं और कहते है कि फला हमारे लेबल का नहीं है…. क्यों.. ? क्यों कि उसी गरीब के नाम पर उसी के खून पसीने और मेहनत से और उसी को भीड़ का हिस्सा बनने और उसे ही आगे करके उसे लाठी डंडा खिला कर ये खुद अमीर बन गए और अब उसी समाज के गरीब को हेय दृष्टि से देखते है, खुद को अमीर समझते है.. और फिर अपने ही समाज के गरीब लड़की लड़कों को घृणित भाव से देखते है…ये तथा कथित अमीर…क्यों गरीब के यहां अपनी बेटी और बेटे का व्याह नहीं करते…? फिर तो अमीर, अमीर के यहां जाते है गरीब से घृणा करते है… एक गरीब जब बीमार होता है तो स्वजातीय लोग उसकी अच्छे और महंगे इलाज के लिए क्यों मदद नहीं करते.. किसी भी अन्य आर्थिक समस्याओं से जुझते व्यक्ति की भी ये तथाकथित जाति वादी कीड़े और जातिवादी ठेकेदार मदद नहीं करते… जो भेदभाव की बात करते है उनसे मेरी गुजारिश है कि जो जिस समाज के बड़े नेता है अधिकारी है समाज सेवी है…व्यापारी है वो क्यों गरीब को हेय दृष्टि से देखते है.. उन्हें सबसे पहले अपने लड़के की शादी हाई फाई सोसाइटी छोड़ कर गरीब लड़की और लड़के से करनी चाहिए लेकिन नहीं करेंगे…. उस समय इनका भेदभाव करने और समाज का हितैषी होने का झूठा प्रलाप कंहा चला जाता है….?…धिक्कार है ऐसे झूठे ठेकेदारों को… घिन आती है ऐसे दोहरे और दोगले चरित्र के लोगों से जो केबल समाज को तोड़ने का कार्य करते हैं समाज मे जहर घोलते है हर जाति में ऐसे चार छह लोग है सबसे पहले इन्हीं के खिलाफ कार्यवाही होनी चाहिए…🤮🥵





