रीवा/गुढ़- 09-01-2026, Rewadarshannews18
आईजी गौरव राजपूत के अभियान को गुढ़ पुलिस दिखा रही है ठेंगा
गुढ़ थाने में अपराध व अपराधियों का साम्राज्य, पुलिस स्वयं दे रही है संरक्षण

गुढ़ थाना क्षेत्र अंतर्गत अपराध व अपराधियों का बोलबाला इस कदर हावी है कि पुलिस स्वयं अपराधियों को संरक्षण दे रही है और उनके सामने नतमस्तक है, यही बजह है कि पुलिस पूरी तरह निष्क्रिय है, और अवैध कार्यो को संरक्षण दे रही है, जिसके चलते क्षेत्र में चोरी, राहजनी, और गांव गांव में शराब तस्करी, गांजा की अवैध बिक्री के अलावा प्रतिबंधित नशीली कफ सिरप का कारोबार खुलेआम फल फूल रहा है, पुलिस है कि अपराधियों और अवैध कारोबारियों से हफ्ता महीना वसूलने में मस्त है, अवैध कारोबारियों के यहां पुलिस पहुंचती जरूर है पर कार्यवाही करने और उस पर लगाम लगाने नहीं बल्कि वसूली करने, यह बात इशारों इशारों में आईजी साहब बोल चुके हैं, लेकिन उन्होंने सुधरने की भी नसीहत भी दी थी, परन्तु गुढ़ पुलिस पर आईजी साहब की नसीहत का भी कोई असर देखने को नहीं मिल रहा, अपराध और अपराधियों की बजह से आम जनता भय और आतंक के साए में जीने को मजबूर है। जिसकी बजह से पुलिस के आला अधिकारियों की छवि भी धूमिल हो रही है।

ताजा घटनाक्रम की बात करें तो बीती रात गुढ़ थाना क्षेत्र अंतर्गत ग्राम पंचायत बरसैता स्थित चोरों ने चोरी की एक बड़ी घटना को अंजाम दिया है, और सुदर्शन यादव के घर में बंधी आधा दर्जन से अधिक बकरी ढील ले गए, इस चोरी की घटना से इनके ऊपर संकट का पहाड़ टूट पड़ा है, पीड़ित सुदर्शन यादव के मुताबिक गत दिवस उनके घर बकरी खरीदार मुन्ना खान, तथा बघ्घा खान निवासी गुढ बकरी खरीदने बारी बारी से पहुंचे थे, लेकिन मुन्ना खान से सौदा नहीं पट पाया था, वहीं दूसरे खरीदार बघ्घा खान से 49500/- में सौदा तंय हो गया और इसके द्वारा 4500/- रुपये बतौर एडवान्स देकर 06 बकरी और 01, बकरा खरीदा गया, और कहा गया कि आगामी 17, जनवरी को बचा हुआ पैसा देकर खरीदी गई बकरियों को उठा लिया जायेगा, लेकिन इसे बदकिस्मती ही कहेंगे कि रात में चोरों ने 07 बकरियों को पार कर दिया है, इसके पूर्व भी इस मोहल्ले से कुछ माह पूर्व ललाऊ कोल के घर से भी 02 बकरियां इसी तरह से चोरी हुई थी जिसकी शिकायत पुलिस से की गई थी, लेकिन पुलिस कुछ नहीं कर पाई और पुनः घटना की पुनरावृत्ति हो गई, इधर बीती रात हुई घटना की सूचना पीड़ित द्वारा गुढ़ थाने और 112 नंबर को दे दी गई लेकिन पुलिस अपनी औपचारिकता पूरी कर के खानापूर्ति करने तक ही सीमित है।





