लखनऊ, 31 दिसंबर 2025, Rewa darshan news
यूपी की राजनीति में ब्राह्मण विधायकों की बैठक को लेकर इन दिनों चर्चाओं का बाजार गर्म है इसी बात पर उत्तर प्रदेश वरिष्ठ नेता उप मुख्यमंत्री से पूछे गए सवाल पर उपमुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य ने जिस तरह से संतुलित और परिपक्व अंदाज़ में जवाब दिया, वह प्रदेश की राजनीति में चर्चा का विषय बन गया है। उनके बयान को राजनीतिक हलकों में सधे हुए नेतृत्व और अनुभव का प्रतीक माना जा रहा है।
राजनीतिक जानकारों का यहां तक कहना है कि केशव प्रसाद मौर्य ने न तो किसी वर्ग को ठेस पहुंचाई और न ही अनावश्यक विवाद को हवा दी। उन्होंने स्पष्ट संकेत दिया कि पार्टी और संगठन जनभावनाओं के अनुरूप चलते हैं, न कि किसी व्यक्ति विशेष को प्रसन्न करने के लिए गढ़ी गई ‘ईश्वरीय’ या बनावटी स्क्रिप्ट के आधार पर।
इसी मुद्दे पर भाजपा नेता पंकज चौधरी के पूर्व बयानों की तुलना भी की जा रही है। कई राजनीतिक टिप्पणीकारों का मानना है कि पंकज चौधरी को केशव प्रसाद मौर्य की राजनीतिक भाषा और संयम से सीख लेने की जरूरत है, ताकि संवेदनशील सामाजिक विषयों पर अनावश्यक टकराव से बचा जा सके।
प्रदेश की राजनीति में यह संदेश भी साफ गया है कि प्रदेश अध्यक्षी और संगठनात्मक निर्णय केवल शीर्ष नेतृत्व की कृपा पर नहीं, बल्कि कार्यकर्ताओं और समाज की व्यापक जनभावना पर आधारित होने चाहिए। केशव मौर्य का यह बयान इसी सोच को मजबूत करता नजर आया।
कुल मिलाकर, ब्राह्मण विधायकों की बैठक पर दिया गया केशव मौर्य का जवाब न सिर्फ संतुलित रहा, बल्कि यह भी दिखाता है कि अनुभव और राजनीतिक परिपक्वता किस तरह जटिल सवालों को सहज बना सकती है।





