हादसों के बाद एक्शन में आई सरकार, और अधिकारियों पर गिरी गाज, और किया गया मुआवजे का ऐलान,
Rewa darshan news, 31, दिसंबर 2025,

प्रदेश की औद्योगिक राजधानी इंदौर में दूषित जल पीने से आठ मासूम बच्चों की मौत का मामला सामने आया है। वहीं प्रशासन ने तीन मौतों की पुष्टि की है। जानकारी के मुताबिक डर्टी वाटर पीने से अभी तक मे 150 से अधिक लोग बीमार हो गए है, इस बड़ी लापरवाही से इन्दौर ही नहीं बल्कि पूरा प्रदेश दहल गया है।
देश के सबसे स्वच्छ शहरों में शुमार होने वाले इंदौर की छवि पर बड़ा धब्बा मानी जा रही है यह घटना जो पूरे सिस्टम को शर्मशार कर दी है, और भागीरथपुरा की यह घटना गहरा एक गहरा दाग बनकर गई है। जंहा दूषित पानी के कारण लोग लगातार बीमार पड़ रहे हैं, लगतार मौत का सिलसिला बढ़ता जा रहा है स्थानीय स्तर पर अब तक 8 लोगों की जान जाने की जानकारी निकल कर सामने आ रही है, लेकिन शासन की ओर से फिलहाल 3 मौतों की आधिकारिक पुष्टि की गई है। अधिकारिक पुष्टि के लिए जब सीएमएचओ डॉ. माधव हसानी से बातचीत करने संपर्क किया गया तो उनसे बात नहीं हो सकी है।

सरकारी आंकड़ों में कुल तीन मौत
सरकारी आंकड़ों के अनुसार जिन तीन मौतों की पुष्टि की गई है, उनमें नंदराम उम्र 70, उर्मिला उम्र 60 सहित ताराबाई कोरी उम्र 70, वर्ष शामिल हैं। स्वास्थ्य विभाग का कहना है कि इनकी मृत्यु डायरिया के कारण हुई। वहीं, स्थानीय लोगों और अस्पताल सूत्रों के मुताबिक मृतकों की संख्या इससे कहीं अधिक है। जिन अन्य लोगों की मौत की सूचना मिली है, उनमें गोमती रावत उम्र 50, मंजुला पति दिगंबर उम्र 74, संतोष बिगोलिया, नंदलाल पाल उम्र 75, उर्मिला यादव उम्र 69, उमा कोरी उम्र 31 और सीमा प्रजापति उम्र 50 वर्ष के नाम सामने आए हैं।
लगातार बढ़ रहा डायरिया का मामला
दूषित जल के कारण क्षेत्र में डायरिया बढ़ता जा रहा है और मौतों का सिलसिला थमने का नाम नहीं ले रहा है, बताया जा रहा है कि पिछले एक सप्ताह से क्षेत्र में उल्टी, दस्त और बुखार के मरीज लगातार सामने आ रहे है, 26 दिसंबर को गोमती रावत की मौत इस पूरे घटनाक्रम की पहली कड़ी थी। इसके बाद धीरे-धीरे बीमार लोगों की संख्या बढ़ती गई और पांच दिनों के भीतर मौतों का आंकड़ा आठ तक पहुंच गया है बावजूद इसके शुरुआती दौर में स्थिति को गंभीरता से नहीं लिया गया। पहली मौत को पुरानी बीमारी बताकर मामला दबाने की कोशिश भी की गई, लेकिन जब हालात बिगड़ने लगे तब प्रशासन हरकत में आया है।

150 से अधिक लोग बीमार
इस पूरे मामले का खुलासा उस समय हुआ जब मंत्री कैलाश विजयवर्गीय अचानक दिल्ली से इंदौर पहुंचे और वर्मा हॉस्पिटल का निरीक्षण किया। इसके बाद सामने आया कि 150 से अधिक लोग बीमार हो चुके हैं और कई अस्पतालों में मरीज भर्ती हैं। वर्तमान में विभिन्न अस्पतालों में 125 से ज्यादा मरीजों का इलाज चल रहा है। इनमें वर्मा हॉस्पिटल में 30, ईएसआईसी हॉस्पिटल में 11, एमवाय हॉस्पिटल में 5, त्रिवेणी हॉस्पिटल में 7 और अरविंदो हॉस्पिटल में 2 मरीज भर्ती हैं। अन्य निजी अस्पतालों में भी मरीज भर्ती हैं, जिनके हालत में कुछ सुधार होने पर उन्हें छुट्टी दे दी जाती है।

इधर स्वास्थ्य विभाग और जिला प्रशासन ने क्षेत्र में बड़े पैमाने पर सर्वे और उपचार अभियान शुरू किया है। सीएमएचओ डॉ. माधव हसानी के अनुसार अब तक 2703 घरों का सर्वे किया जा चुका है और करीब 12 हजार लोगों की जांच की गई है। इनमें से 1146 मरीजों को मौके पर ही प्राथमिक उपचार दिया गया जबकि 125 से अधिक मरीज को अस्पताल में भर्ती कराना पड़ा है। 18 मरीज उपचार के बाद स्वस्थ होकर घर लौट चुके हैं। भागीरथपुरा की 15 गलियों में डॉक्टरों और पैरामेडिकल स्टाफ की टीमें घर-घर जाकर लोगों की जांच कर रही हैं। गंभीर मरीजों को एम्बुलेंस के जरिए अस्पताल पहुंचाया जा रहा है। आशा कार्यकर्ताओं द्वारा क्लोरीन टैबलेट, जिंक और ओआरएस का वितरण भी किया जा रहा है।

शौचालय के नीचे से गुजर रही थी पाइप लाइन
जांच के दौरान यह बात सामने आई है कि भागीरथपुरा में पुलिस चौकी से लगे शौचालय के नीचे से गुजर रही मुख्य जल आपूर्ति लाइन में लीकेज था। आशंका जताई जा रही है कि इसी लीकेज के कारण गंदा पानी पेयजल लाइन में मिल गया, जिससे यह भयावह स्थिति पैदा हुई। स्थानीय लोगों का आरोप है कि वे पिछले 15 दिनों से बदबूदार और दूषित पानी आने की शिकायत कर रहे थे लेकिन जिम्मेदार अधिकारियों ने कोई ध्यान नहीं दिया।
जिम्मेदारों पर हुई कार्रवाई
मामले में लापरवाही बरतने पर नगर निगम और पीएचई विभाग के अधिकारियों पर कार्रवाई की गई है। जोनल अधिकारी शालिग्राम शितोले को निलंबित किया गया है, साथ ही प्रभारी सहायक अभियंता योगेश जोशी को सस्पेंड कर दिया गया है, जबकि प्रभारी डिप्टी इंजीनियर शुभम श्रीवास्तव की सेवाएं समाप्त कर दी गई हैं। इसके अलावा तीन सदस्यीय जांच समिति गठित की गई है जिसकी अध्यक्षता आईएएस नवजीवन पंवार कर रहे हैं।
दो-दो लाख मुआवजा की घोषणा
मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने मामले को संज्ञान में लेते हुए मृतकों के परिजन को 2-2 लाख रुपए की आर्थिक सहायता देने की घोषणा की है। वहीं, मंत्री कैलाश विजयवर्गीय ने कहा है कि 70 से अधिक पानी के सैंपल जांच के लिए भेजे गए हैं और सभी मरीजों का इलाज पूरी तरह सरकारी खर्च पर किया जाएगा। जिन लोगों ने इलाज के लिए निजी अस्पतालों में पैसे जमा किए हैं, उन्हें भी राशि वापस दिलाई जाएगी।
फिलहाल क्षेत्र में 50 टैंकरों के माध्यम से पानी की आपूर्ति की जा रही है और लोगों को उबला हुआ पानी पीने, बाहर का खाना न खाने और किसी भी तरह के लक्षण दिखने पर तुरंत स्वास्थ्य केंद्र पहुंचने की सलाह दी जा रही है।





