Rewa darshan news रीवा 30, दिसम्बर 2025,

मध्यप्रदेश शासन के उप मुख्यमंत्री राजेन्द्र शुक्ल प्राकृतिक खेती को बढावा देने की दिशा में स्वयं आगे आए और अपने रीवा स्थित हरिहरपुर फार्म हाउस में प्राकृतिक खेती कर किसानों के लिये प्रेरणा स्त्रोत बन गए हैं। उन्होंने अपने फार्म हाउस पहुंचकर प्राकृतिक खेती का निरीक्षण किया।

उप मुख्यमंत्री के फार्म हाउस में प्राकृतिक रूप खेती से पालक, मेथी, धनिया, बथुआ, चौराई, शलजम गाजर आदि सब्जियों का उत्पादन किया जा रहा है। इसी प्रकार प्राकृतिक बीजामृत से गेंहू की फसल भी बोई गई है, जिसमें गोबर की खाद का उपयोग किया गया है। यूरिया के विकल्प के तौर पर कल्चर का उपयोग गेंहू की फसल में उत्पादन के लिये किया जायेगा। इस अवसर पर उप मुख्यमंत्री ने कहा कि प्राकृतिक खेती केवल एक कृषि तकनीक नहीं, बल्कि जीवन जीने का भारतीय पद्धति है। इससे किसानों की लागत घटाने, आय बढ़ाने और उन्हें बाहरी निर्भरता से मुक्ति मिलती है। इसके उत्पादन से हमारे धरती का तथा परिवार का स्वास्थ्य भी ठीक रहता है। उन्होंने किसानों से आह्मवान किया कि अपने खेती योग्य भूमि में से 10 प्रतिशत भूमि में प्राकृतिक खेती करें तथा स्वस्थ्य रहें।

उप मुख्यमंत्री ने कहा कि प्राकृतिक खेती को आत्मनिर्भर भारत और विकसित भारत के लक्ष्य से जोड़ा गया है। जिले में बसामन मामा गौवन्य विहार में प्राकृतिक खेती प्रशिक्षण केन्द्र का शुभारंभ हो चुका है। हरिहरपुर फार्म हाउस में इस क्षेत्र के किसानों को प्राकृतिक खेती का प्रशिक्षण दिया जायेगा तथा उन्हें यहां का भ्रमण कराकर प्राकृतिक खेती करने के लिये प्रेरित किया जायेगा। इसी क्रम में हिनौती गौधाम में भी प्राकृतिक खेती प्रशिक्षण केन्द्र बनाया जायेगा। उप मुख्यमंत्री ने कहा कि रीवा जिले को प्राकृतिक खेती के क्षेत्र में अग्रणी जिला बनाना है। उन्होंने कहा कि गौशालाएं गौसंरक्षण केन्द्र नहीं बल्कि कृषि आदानों के उत्पादन के आर्थिक केन्द्र के रूप में विकसित की जा रही है। गोबर व मूत्र से तैयार जीवामृत, बीजामृत और पंचगव्य जैसे प्राकृतिक इनपुट मिट्टी के सूक्ष्म जीवों में सक्रिय रहते हैं और भूमि की उर्वरता को दीर्घकाल तक बढ़ाते है। उप मुख्यमंत्री ने फार्म हाउस में पीपल के वृक्षों का रोपण किया।

उन्होंने अपने पूज्य पिता जी के समाधि स्थल पहुंचकर उनका पुण्य स्मरण किया व श्रृद्धांजलि दी। इस दौरान अध्यक्ष नगर निगम व्यंकटेश पाण्डेय, पूर्व संयुक्त संचालक डॉ. राजेश मिश्रा, कृषि वैज्ञानिक डॉ. राजेश सिंह एवं श्री श्री रविशंकर संस्थान के प्रशिक्षक उपस्थित रहे।





