बस अब और नहीं…डेढ़ साल में 4 करोड़ टैक्स भरकर कंपनी फाउंडर हुआ हलाकान, अब किया ये बड़ा फैसला
नई दिल्ली, 28, दिसंबर 2025,

भारत के टैक्स और कंप्लायंस सिस्टम को लेकर एक बार फिर बहस तेज हो गई है. बेंगलुरु के एक उद्यमी ने सार्वजनिक रूप से ऐलान किया है कि वह 2026 में अपना कारोबार भारत से बाहर ले जाने की योजना बना रहे हैं. उनका कहना है कि ईमानदारी से टैक्स भरने वाली कंपनियों पर जरूरत से ज्यादा दबाव डाला जाता है. इस बयान के बाद स्टार्टअप और कारोबारी जगत में चर्चाओं का दौर शुरू हो गया है.
डेढ़ साल में ₹4 करोड़ टैक्स, फिर भी परेशानी

लॉजिस्टिक्स कंपनी Aflog Group के फाउंडर रोहित श्रॉफ ने बताया कि उन्होंने पिछले 12 से 18 महीनों में GST और इनकम टैक्स मिलाकर करीब 4 करोड़ रुपये का भुगतान किया है. इसके बावजूद टैक्स विभाग की ओर से लगातार नोटिस, ऑडिट और स्पष्टीकरण मांगे जाते हैं. उनका कहना है कि नियमों का पूरी तरह पालन करने वाली कंपनियां भी शक के दायरे में रहती हैं, जिससे मानसिक और आर्थिक दबाव बढ़ता है.
बार-बार नोटिस और ऑडिट से बढ़ता बोझ

रोहित श्रॉफ के मुताबिक भारत में केवल 5 फीसदी से भी कम लोग डायरेक्ट इनकम टैक्स भरते हैं, लेकिन यही वर्ग बार-बार जांच और पूछताछ का सामना करता है. GST के मासिक रिटर्न, TDS के तिमाही स्टेटमेंट और सालाना टैक्स फाइलिंग के बावजूद स्थानीय GST ऑफिस और केंद्रीय आयकर विभाग की अलग-अलग टीमें सवाल उठाती रहती हैं. इससे कारोबार चलाने के बजाय उद्यमियों की ऊर्जा कंप्लायंस में ही खर्च हो जाती है.
‘सिस्टम से लड़ना, सिस्टम मानने से ज्यादा महंगा’

श्रॉफ का कहना है कि मौजूदा व्यवस्था में सिस्टम से सवाल करना और उसका विरोध करना, चुपचाप सब सह लेने से ज्यादा महंगा पड़ता है. कानूनी लड़ाई में समय, पैसा और संसाधन तीनों बर्बाद होते हैं. इसी वजह से ज्यादातर उद्यमी बोलते नहीं हैं. उनका आरोप है कि टैक्स देने वाला वर्ग राजनीतिक रूप से कमजोर अल्पसंख्यक है, इसलिए सिस्टम का झुकाव बहुसंख्यक को खुश करने की ओर रहता है.
विदेशों में बेहतर माहौल की उम्मीद

रोहित श्रॉफ ने भारत की तुलना विदेशों से करते हुए कहा कि कई भारतीय उद्यमी बाहर इसलिए सफल होते हैं, क्योंकि वहां विकास को सजा नहीं दी जाती. उनके मुताबिक भारत में टैक्स और नियमों की जटिलता ग्रोथ को बढ़ावा देने के बजाय उसे रोकती है. उन्होंने साफ किया कि 2026 में बिजनेस शिफ्ट करने का फैसला देशभक्ति से जुड़ा नहीं, बल्कि व्यावहारिक सोच का नतीजा है.
‘बिल्ड इन इंडिया’ के सपने पर सवाल
इस बयान ने एक बार फिर ईज ऑफ डूइंग बिजनेस और टैक्स सुधारों पर सवाल खड़े कर दिए हैं. स्टार्टअप जगत में यह चर्चा तेज हो गई है कि अगर ईमानदार टैक्स देने वालों को ही राहत नहीं मिलेगी, तो नए उद्यमी कैसे आगे आएंगे. रोहित श्रॉफ का फैसला सिर्फ एक व्यक्ति की कहानी नहीं, बल्कि उस सिस्टम की ओर इशारा करता है, जिससे कई कारोबारी अंदर ही अंदर जूझ रहे हैं।





